Sunday, September 7, 2008

मेरी कलम से ....................मेघना

जिंदगी में तुम हमारी आओ

दिल ने ये सोचा है कब से

हाथों की लकीरों में अपनी

तुम्हे हम ढूंढते है कब से

खुश रहो तुम ये दुआ है रब से

इश्क तुम्ही से करते है हम कितना

ये तुम्हे तो मालूम नही ..............

यादें दिल में रख कर जियेंगे अब से !!!!!!!

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MERI KALAM SE..................................MEGHNA

ZINDAGI MEIN TUM HAMARI AAO

DIL NE YE SOCHA HAI KAB SE

HAATHON KI LAKEERON MEIN APNI

TUMHE HAM DHOONDHTE HAI KAB SE

KHUSH RAHO TUM YE DUA HAI RAB SE

ISHQ TUMHI SE KARTE HAI HAM ITNA

YE TUMHE TO MAALOOM NAHI..............

YAADEN DIL MEIN RAKH KAR JIYENGE AB SE !!!

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