Saturday, October 4, 2008

मेरी कलम से ..........................................मेघना


वो तो इक बहाना था तेरी जुदाई का
अपनी तो किस्मत में ही था
ये पल रुसवाई का -------------------
आज तो ये आलम है तन्हाई का
कि लगता है जैसे ----------------
मौसम ही आ गया हो रुलाई का





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MERI KALAM SE------------------------------------MEGHNA


WO TO IK BAHAANA THA TERI JUDAAI KA
APNI TO KISMAT MEIN HI THA
YE PAL RUSWAAI KA-------------------------
AAJ TO YE AALAM HAI TANHAAI KA
KI LAGTA HAI JAISE-------------------
MAUSAM HI AA GAYA HO RULAAI KA
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